महावीर जन्म कल्याणक यात्रा

जैन धर्म में सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है भगवान महावीर का जन्म कल्याणक, जिसे महावीर जयंती या महावीर जनम कल्याणक के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भगवान महावीर स्वामी के जन्म का उत्सव मनाता है, जो जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे। उन्होंने अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम के मार्ग को दुनिया के सामने रखा।

जन्म कल्याणक का महत्व

भगवान महावीर का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ था। कल्पसूत्र के अनुसार, उनका जन्म वैशाली के पास कुंडग्राम में राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के घर हुआ। जन्म के समय देवताओं ने स्वर्ग से उतरकर उनका अभिषेक किया और उन्हें पुष्पों से स्नान कराया। यह दिन जैन अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र है, क्योंकि यह न केवल जन्म का उत्सव है, बल्कि अहिंसा और करुणा के संदेश का प्रतीक भी है।

2026 में यह पर्व 31 मार्च को मनाया जाएगा (कुछ स्थानों पर तिथि के अनुसार 1 अप्रैल तक भी)।

महावीर जन्म कल्याणक यात्रा (रथ यात्रा) का आकर्षण

इस पर्व का सबसे भव्य और दिल छू लेने वाला हिस्सा होता है रथ यात्रा या शोभा यात्रा। जैन मंदिरों में भगवान महावीर की मूर्ति को सुंदर रथ पर विराजमान किया जाता है। भक्तगण इस रथ को सड़कों पर घुमाते हैं, भजन-कीर्तन गाते हैं, स्तवन (धार्मिक भजन) सुनाते हैं और जयकारे लगाते हैं।

  • प्रक्रिया: सुबह मंदिर में अभिषेक, पूजा-अर्चना के बाद रथ यात्रा निकलती है। रथ पर फूलों, झंडियों और दीयों से सजावट की जाती है।
  • माहौल: पूरा वातावरण भक्ति से भर जाता है। लोग रास्ते में खड़े होकर दर्शन करते हैं, प्रसाद बांटा जाता है और अहिंसा का संदेश फैलाया जाता है।
  • मुख्य स्थान: गुजरात (पालitana, गिरनार), राजस्थान, पटना, मुजफ्फरनगर, नागपुर, हावड़ा, नोएडा आदि शहरों में बड़ी यात्राएं निकलती हैं। पटना में वैशाली के निकट होने के कारण विशेष महत्व है।

यह यात्रा केवल एक जुलूस नहीं, बल्कि भगवान महावीर के सिद्धांतों—अहिंसा परमो धर्मः—को समाज में फैलाने का माध्यम है। कोई हिंसा नहीं, कोई झगड़ा नहीं—सिर्फ शांति और भक्ति।

कैसे मनाते हैं जैन भक्त?

  • मंदिरों में स्नान, पूजा, प्रवचन।
  • उपवास या फलाहार।
  • दान-पुण्य, गरीबों को भोजन।
  • शाम को भजन-संध्या और आरती।
  • रथ यात्रा के दौरान स्तवन जैसे “जन्मे हैं महावीर प्यारे” गाए जाते हैं।

कुछ खास दृश्य

कल्पना कीजिए—सजी-धजी सड़कें, रंग-बिरंगे झंडे लहराते हुए, रथ पर भगवान की मूर्ति मुस्कुराती हुई, और चारों तरफ भक्तों की मधुर आवाजें गूंज रही हैं। यह दृश्य देखकर मन शांत हो जाता है।

महावीर जन्म कल्याणक यात्रा हमें याद दिलाती है कि जीवन का असली उद्देश्य है—आत्मा की शुद्धि और सभी प्राणियों के प्रति करुणा। जय जिनेंद्र! जय महावीर!

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